In and out

We all have those uninvited moments where we doubt our decisions , our choices and ….fear … just takes over.

Today my heart has been in and out
I don’t know what is it about
Its one of those days,
When my fears wants to go naked
Whether , will I be be able to make

it?

Do you also have those fears ?

Advertisements

India and the World Cup

हार और जीत तो खेल का हिस्सा है,
इस बड़ी सी ज़िन्दगी का एक छोटा सा किस्सा है।
ये धुंधली आंखे बेकार है,
आगे देखो, मौके हज़ार है! ♥️♥️♥️

Go Team India ! ✨✨

Nostalgic

Once again I want to return to that summer of 2005 when I was 8 years old.
Fantasizing about making my own decisions but not yet making them.
wanting to be one of the adults but not yet

ready for it.

learning and hearing about things , people and everything that’s in between because I want to and not because I have to.
Once again I want to go back to that place from where I wouldn’t be just thinking about this poem but living it.

मै बड़ी तो हो गई हूं पर..

मैं बड़ी तो हो गई हूं पर दिल अब कुछ छोटा सा लगता है।

वो आंखो की शरारत सूख गई है,

हसीं जैसे लभो से रूठ गई है।
अपने सपने तो पूरे हो रहे है,
पर अपनों से मिलने के नहीं।
पहले मै अपनी कॉलोनी की उन तंग गलियों में बेतःशा दौड़ लगाता था, नंगे पांव , मैले से कपड़े लिए । ना कोई मकसद हुआ करता था ना थी कोई वक़्त की पाबंदी।
अब तो मानो घड़ी के इन कांटो की ग़ुलाम बन गई हूं।
मै अंजान थी कि नए जूते और चमकते सूट की कीमत थी ये।

कीमत तो अदा करना जानती हूं मै,

पर कुछ चीजो कि कीमत ही भूल गई हूं।
मै बड़ी तो हो गई हूं पर………