Yudh..

एक युद्घ है भीतर ही भीतर ..
ख़्वाहिशें भी खुद से और बगावत भी खुद से
एक तरफ अनमोल सपने और
दूसरी तरफ साहस का तराज़ू
एक पैर जमाने के साथ और
दूसरा कही मन के दलदल मे फसा हुआ..
आईने के उस पार मेरा अक्स या इस तरफ खड़ी मैं ?